गीत/नवगीत

यशुमति नंदलाला

मोर मुकुट शीश धरे श्यामल कृष्ण कन्हाई,
यदुनंदन की मुरली की तान हर मन को भाई ।

वृंदावन की गलियों में घूमें है यशुमति नंदलाला,
मधुर-मधुर मुरलिया बजाऍं काली कमली वाला,
गोरी-गोरी राधिका से करें हॅंसी-ठिठोली लड़ाई,
यदुनंदन की मुरली की तान हर मन को भाई ।

गईयन को है प्यारो नटखट गोविंद गोपाला,
वाकी दीवानी भईन सारी ग्वालिन बृजबाला,
हॉंडी़ दूध-दही की फोड़े खावे है दूध मलाई,
यदुनंदन की मुरली की तान हर मन को भाई ।

गोप-गोपीयों संग खेले खेल जग का रखवाला,
भक्तो ने पहनाई कृष्ण को प्रेमी मन की माला,
धरा पर हरि ने “आनंद” अद्भुत लीलाऍं दिखाई,
यदुनंदन की मुरली की तान हर मन को भाई ।

मोर मुकुट शीश धरे श्यामल कृष्ण कन्हाई,
यदुनंदन की मुरली की तान हर मन को भाई ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु

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