हरमन, तुमने क्यों छोड़ी कमान?
हरमन, तुमने क्यों छोड़ी कमान,
आज यह पूछ रहा है हिंदुस्तान।
जीत की राहों की ‘तुम: सरताज,
तुमसे रोशन हुआ देश का मान।
तुमने ही सिखाया हार नहीं होती,
हाँ,जब हौसलों में आग जगी हो।
राह में मुश्किलें जितनी भी आए,
मंज़िल फिर भी सामने खड़ी हो।
जहाँ बल्ले की हर एक चोट में,
हमारे भारत का ये विश्वास रहा।
यूं हर एक रन में संघर्ष तुम्हारा,
हरेक जीत में भी इतिहास रहा।
टीम को ‘विश्व विजेता’ बनाकर,
तुमने अपना खूब फर्ज निभाया।
नई कप्तान को रास्ता दिखाकर,
नेतृत्व का गहन अर्थ समझाया।
वर्तमान कप्तानी छोड़ी, प्रेम नहीं,
देशवासियों से रिश्ता कैसे टूटेगा?
भारत की हरेक बेटी के सपनों में,
तुम्हारा ये साहस फिर से जुटेगा।
आँखों में शायद नमी भी रही हो,
दिल में यादों का बदस्तूर संसार।
पर यह विदाई भी कितनी सुन्दर,
जब पीछे हो विजयों का अम्बार।
— संजय एम तराणेकर
