डिजिटल युग में खोते मानवीय मूल्य
युग ने हम सबको अपना गुलाम बना लिया है,हमारी भावनाएं, सभ्यता, संस्कार, संवेदनाएं और मानवीय मूल्यों को छीन करहमें अपने जैसा यंत्र सा बना दिया है।मगर हम सिर्फ डिजिटल युग को दोषी नहीं कह सकते हम खुद इसके जिम्मेदार हैं,जैसे पहले तो हम शराब पीते हैं फिर धीरे-धीरे शराब हमें पीने लगती है,ठीक उसी तरह हम डिजिटल युग के दलदल में इतना गहरे तक फँस चुके हैं कि अपने मानवीय मूल्यों को भी खोते जा रहे हैं अपने आपको मानव से मशीन बना रहे हैं,और कुछ सोच-समझ भी नहीं पा रहे हैं।
