कविता सीप-सा घर डॉ. पूनम माटिया 09/09/201629/10/2017 बूँद से जो छलके आँख से कौन जाने ग़म के हैं या हैं ख़ुशी के आँसू थाम लिए हथेली पे कौन जाने ग़ैर के हैं या हैं उसी के आँसू सीप-सा घर दे, मोती किये कौन जाने नेकी हैं या हैं बदी के आँसू — डॉ पूनम माटिया