रामलीला
श्री राम प्रभु के गुण गाता संसार हैं।
सियाराम चरणों में वंदन बारंबार हैं।
एकवचनी पुरुषोत्तम थे अयोध्यापति।
भक्तों का जीवन खूब संवारे रघुपति।।
रामलीला मंचन से हिय होता पुलकित।
संस्कारों का बीजारोपण करता मन हर्षित।।
भारतीय संस्कृति का अनुपम होवे दर्शन।
मन भाता दशरथ नंदन का जीवन मंचन।।
देख रामलीला मन अति उत्साहित होता।
पूर्वजो के आशीष से मन सुरभित होता।।
आदर सम्मान, धर्म भाव से मन भर-भर आता।
सन्मार्ग पथ पर चलने को मन लालायित रहता।।
