कविता

हरियाणा दिवस – गौरव की धरती

हरियाणा की मिट्टी सोंधी, सुगंध बिखेरै चारों ओर,
हल चलावै किसान हंसकै, खेतां मं लहरै लोर।

जहाँ गीता का उपदेश मिल्यो, कर्म का जो सार,
कुरुक्षेत्र की पावन धरती, सिखा दे सदाचार।

पानीपत के रण में लड़ी, वीरां की ललकार,
म्हारी छोरियां भी कम ना — दुनिया करे सलाम बार-बार।

यहाँ दूध-दही की नदिया बहें, अर मन सै लोग बड़े नेक,
मेहनत, सच्चाई, हिम्मत सै — हरियाणवी रहवे एक!

त्योहारां में मेल-जोल सै, गीतां में उल्लास,
भाईचारे की सीख दे — हर घर में विश्वास।

ना जात-पात का झगड़ा, ना नफरत की बात,
हर दिल मं बस एक बात — “हरियाणा मेरी मात!”

चलो आज ये प्रण लें —
इस धरती का मान बढ़ावां,
मेहनत, इमान अर एकता सै,
हरियाणा का नाम चमकावां!

हरियाणा दिवस की लाख-लाख बधाई!
जय हरियाणा — जय भारत!

— डॉ. प्रियंका सौरभ

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh