नेक हरियाणवी
धरम-करम का पालन करै, गीता सै उपदेश,
सच माने तो हरि बसै, हरियाणा परदेश!
अमन-चैन की धरती सै, वेदां का ज्ञान,
मिट्टी सै वीरां की — राखे देश की आन!
हट्टे-कट्टे लोग सैं, अलग-अलग सैं भेस,
पर दिल सैं सारे एक — ना राग, ना द्वेष!
कुरुक्षेत्र की धरती सै, कर्म का परवाह,
पानीपत का मैदान — लड़े कित-कित राह!
चप्पे-चप्पे मं लिखी, बलिदान की लेख,
आंदोलन का गढ़ सै — जगा सारा देश!
मर्दां युद्ध पलट दिये, छोरियां जित ली तीर,
एक-नेक हरियाणवी — सिखा दें धीर-वीर!
त्योहारां मं मेल-जोल, गीतां का परिवेश,
मानवता का पालन — प्रेम का संदेश!
माथे इस धरती पे, सरस्वती का बास,
हरि खुद रहै इब्ब के — हरियाणा खास!
एक-नेक हरियाणवी — दिल सै नेक सैं सब,
धरती सै सोने की — मन सै दूध जैं सफेद!
— डॉ. सत्यवान सौरभ
