कह डालो
अपने छुपे हुए जज़्बात यदि जरूरी समझो
तो बेझिझक बाहर निकालो,
दबा कर न रखो अंदर
घुटन से अच्छा है जो कहना है कह डालो,
कहने से शायद मन हल्का हो जाये,
सामने से हो सके सकारात्मक प्रतिक्रिया आये,
बड़े से बड़े समस्याओं का हल
मिलजुलकर निकाला जाता है,
मुश्किल हालातों को संभाला जाता है,
किसी के भी प्रति जलन,ईर्ष्या न पालो,
घुटन से अच्छा है जो कहना है कह डालो,
अपनों द्वारा अपनों को छलते देखा है,
चरागों से ही आशियाना जलते देखा है,
जुल्म और ज्यादतियां न सहो,
प्रतिकार के दो शब्द जरूर कहो,
अलग थलग रहने से कोई फायदा नहीं,
जीवन जीने का ये कोई कायदा नहीं,
वक्त आये तो जो जिस भाषा में समझे
उसे सुनाना जरूरी है वहीं भाषा,
यदि पाखंड में फंसे हो तो क्या इसरो,क्या नासा,
देश को संभालना है तो तरीके से संभालो,
ओछी हरकतों से जनाजा न निकालो,
अपने छुपे हुए जज्बात यदि जरूरी समझो
तो बेझिझक बाहर निकालो,
दबाकर न रखो अंदर
घुटन से अच्छा है जो कहना है कह डालो।
— राजेन्द्र लाहिरी
