कुण्डली/छंद

मौसम मदमाया

मौसम मदमाया हुआ, उड़े अबीर-गुलाल
बिना मले ही गाल भै,चर तरुणी के लाल
चर तरुणी के लाल, ताल दइ बुढ़वा नाचें
कलियन देख भ्रमर, गलियन में भरें कुलांचे
कह सुरेश फगुनाइ रहल बुढ़वा गोबराया
पगलाइल देवर जब से मौसम मदमाया

— सुरेश मिश्र

सुरेश मिश्र

हास्य कवि मो. 09869141831, 09619872154