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अंतस् की 79 गोष्ठी में बरसे होली के रसीले रंग

‘अंतस्’ संस्था के तत्वावधान में आयोजित 79वीं मासिक काव्य-गोष्ठी में होली के आने का उत्साह कवियों की शानदार प्रस्तुतियों में देखने को मिला। दिल्ली एन सी आर की प्रसिद्ध कवयित्री श्रीमती वंदना कुँअर रायज़ादा की अध्यक्षता में आयोजित इस गोष्ठी का कुशल संयोजन व संचालन अंतस् संस्था की अध्यक्ष डॉ. पूनम माटिया ने अनुशासित व् रोचक अंदाज़ में किया।
अलीगढ़ से डॉ दिनेश कुमार शर्मा के सान्निध्य से लाभान्वित होते हुए मुख्य अतिथि की भूमिका में कोलकाता, पश्चिम बंगाल से श्री कृष्ण कुमार दुबे तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे जयपुर, राजस्थान से कवि श्री लक्ष्मण सिंह|

कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्वी दिल्ली की श्रीमती सुनीता अग्रवाल द्वारा राग मालकोस में लोक गीत ‘रंग डारो न हम पर बार-बार/ मोहे भर पिचकारी मार-मार’ हुआ। इसके पश्चात उपरोक्त के संग-संग देश के विभिन्न राज्यों से जुटे विभिन्न रचनाकारों-ग़ाज़ियाबाद से श्रीमती सोनम यादव, श्रीमती पूनम सागर, दिल्ली से डॉ नीलम वर्मा, अंतस् की वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीमती अंशु जैन ने विभिन्न विधाओं में होली उत्सव के विभिन्न पक्षों को उजागर किया|

गोष्ठी की अध्यक्ष वंदना कुँअर रायज़ादा ने सभी प्रस्तुतियों के लिए अपने सकारात्मक विचार व्यक्त करते हुए ‘अंतस्’ की गतिविधियों को सराहा और अपनी पंक्तियों से सभी का मन मोह लिया- “साँसों को नवजीवन दें उन रंगों का मधुमास है होली/ लुकती-छिपती निज भाभी से प्रिय देवर का परिहास है होली/ ग़म से भरे इस जीवन में नित एक मधुर आभास है होली/ इक सजनी के मन के ब्रज में प्रिय कान्हा औ राधे का रास है होली”

कोलकाता से अंतस्-गोष्ठी में शामिल कृष्ण कुमार दूबे ने पढ़ा-“लगा कर हम गले सब पर लुटाएँ प्यार होली में/ गिले शिकवे मिटा दिल से करें मनुहार होली में/ महकता ही रहे गुलशन हमारे देश का हरदम/ हमेशा के लिए हो ख़त्म सब तक़रार  होली में”

डॉ दिनेश कुमार शर्मा ने ब्रज भाषा में मनोहारी गीत से रंग बिखरे-“छोटे खेलें, बडे खेलें, बूडे खेलें, बारे खेलें/ ऊंच-नीच भाव छोड़ खेलें नर-नारियां/ लाठी मार अंगनु झेलें, रंग की तरंग लेवें/ भंग के नशे में चूर छोडें पिचकारियां”

सोनम यादव ने मधुर प्रस्तुति में ईश्वर तक होली के भाव-रंग पहुंचाते हुए पढ़ा- “रंग होली के लेकर चलो अब सखी/ उस परम तक उड़ा दें रँगों की छटा/ इन्द्र धनुषी रंगों से लुटा प्रेम दें/ गंध श्रृद्धा की सुंदर उठे नभ घटा”

बहुआयामी प्रतिभा की धनी डॉ नीलम वर्मा ने होली के सन्दर्भ में ग़ज़ल पढ़ी- “आज होली है रंग खेलेंगे/ दिल में भर के उमंग खेलेंगे”

पूनम सागर ने अपने दोहे और कविता से होली का महत्त्व रेखांकित किया- “नयन गुलाबी मन हरा, पिय के होंठ अबीर/ जब माथे मेरे सजे, मैं हो गई अमीर”

संयोजक डॉ. पूनम माटिया ने होली की ठिठोली को रेखांकित करते हास-परिहास पूर्ण गीत पढ़ कर समां बाँध दिया- “मोरे पिया अब गए बोराए/ सब जन आगे अंग लगाये/ खायी कैसी नशे की गोली/ मैंने पिय संग खेली होली|” इस अवसर पर अंतस् के कोषाध्यक्ष श्री निर्मल जैन, संरक्षक नरेश माटिया, काव्य-रसिक कंवल कोहली सहित कई श्रोता डिजिटल माध्यम से जुड़े और अपनी उत्साहवर्धक प्रतिक्रियाओं से सभी का मनोबल बढ़ाते हुए पर्व की शुभकामनाएँ दीं।

डॉ. पूनम माटिया

डॉ. पूनम माटिया दिलशाद गार्डन , दिल्ली https://www.facebook.com/poonam.matia poonam.matia@gmail.com