या देवी सर्वभूतेषु
जहां स्त्री वहां सृजन शक्ति
न सिर्फ जनन प्राण-शक्ति
संचालिका ऊर्जा प्रशक्ति
दैवीय मूर्ति प्रति भक्ति
ना प्रतीकों प्रति आसक्ति
दैविय मंत्रों की पंक्ति
समझे अर्थ गर व्यक्ति
बुद्धि निद्रा शांति स्तुति
तृष्णा दया चेतना स्मृति
संहार कर पशुत्व वृत्ति
क्रोध मद मोह मुक्ति
प्रतीकों की गढ़ें आकृति
प्रकट हो दैवीय पराशक्ति
अंधकार प्रकाश, पुरुष स्त्री
संतुलन हेतु रची सृष्टि
सर्व मंगल मांगल्ये दैव शक्ति।
— नील मणि
