करुणा का रस
पीकर करुणा का रस
जीवन करो धन्य
जन्म -जन्म सुखदाई
जो करी भलाई
लोकमंगल हो सदा
सत्य राह चुनो भाई ।
हिमालय पुकारता
वीर बनो- धीर बनो
ज्ञान करो अर्जित
विश्व -वसुधा बने सुंदर
मनुजतन महान
चूको न सुअवसर।
हृदय निर्मल- मन निर्मल
घोर- पशुता मिटाओ
जिओ न निष्प्राण हो
रवि सम बनकर
तम जग से मिटाओ
हो पुलकित रोम -रोम शरीर ।
— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
