तजूर्बा एक खूबसूरत सीख देती हुई आगाज़ है
तजूर्बा
चुपचाप चलकर
ज़िंदगी की किताब खोलता है
गिरना
कमज़ोरी नहीं होता
समझ का पहला दरवाज़ा होता है
हर चोट
एक अनकही सीख है
जो भीतर को मजबूत करती है
समय
धीरे-धीरे
सच का आईना दिखाता है
जो खो गया
वही कहीं न कहीं
नई राह बन जाता है
अंधेरे में
चलना ही
रौशनी की पहचान सिखाता है
हर हार
अंदर कुछ नया
जन्म देती है
तजूर्बा
शब्द नहीं
एक जीता-जागता एहसास है
जो दर्द से गुजरता है
वही
गहराई को समझता है
हर ठोकर
आदमी को
आसमान के करीब ले जाती है
खामोशी
भी कई बार
सबसे बड़ा उत्तर होती है
जीवन
सीधा नहीं चलता
मोड़ों में सिखाता है
जो समय को समझ ले
वही
सच्चा ज्ञानी बनता है
तजूर्बा
धूप और छाँव का
मिलाजुला सफर है
हर शुरुआत
किसी पुराने अनुभव की
नई परछाईं होती है
सीख
कभी किताबों से नहीं
ज़िंदगी से आती है
जो रुकता नहीं
वही
आगे की कहानी लिखता है
हर दर्द
एक बीज है
समझदारी के पेड़ का
तजूर्बा
धीरे बोलता है
पर गहराई से समझाता है
जीवन
एक यात्रा है
जहाँ हर कदम शिक्षक है
जो सुन ले
वह बदल जाता है
अंदर से पूरी तरह
हर अनुभव
एक नया अर्थ
जोड़ देता है अस्तित्व में
तजूर्बा एक खूबसूरत सीख देती हुई आगाज़ है
— डॉ. अशोक
