हास्य व्यंग्य

हास्य-व्यंग्य : बिल्लो रानी कहो तो जान दे दूं

बिल्लो रानी को एक मजबूत प्रेमी की आश्यकता महसूस हुई। वह उसी को अपना प्रेम समर्पण करेगी जो जान देने की जंग में सफल होगा। बड़े-बड़े प्रेमी बिल्लो रानी को प्राप्त करने के लिए अपनी जान तक भी देने को तैयार हैं।

बिल्लो रानी ने एक स्वयंवर का आयोजन किया। बिल्लो रानी को वही प्राप्त कर सकता है जो बिल्लो रानी के लिए जान देने को तैयार है। एक से एक लोग इस स्वयवर में आने की तैयारी करने लगे। 

एक प्रेमी का ह्रदय बैठा जा रहा है कि मैं जान दे दूंगा तो बिल्लो रानी हमारी कहां हो पायेगी। किसी और के अंक में चली जायेगी। सतोष की रोटी खाओ, बिल्लो रानी को भगाओ। 

एक प्रेमी ने जोर-शोर से तैयारी की। ऊठक-बैठक करना शुरू कर दिया। तरह-तरह की पौष्टिक सब्जियां तथा फलफूल खाने लगा। तेल मालिश उबटन करने लगा।

बिल्लो रानी सस्ते में मिलने वाली नहीं है। बहुत रियाज करना पड़ेगा। जान की परवाह न करने वाला ही बिल्लो का घूंघट उठायेगा। बिल्लो रानी उसी की घर की दुल्हनियां बनेगी। 

बिल्लो रानी ने कहा जो मेरे लिए फांसी पर चढ़ेगा उसी की सदा-सदा लिए मैं हो जाऊंगी और मेरी करोड़ों की संपत्ति का वह मालिक बन जायेगा। 

एक प्रेमी तो चक्कर खा कर गिर गया। दूसरा तो स्वयंवर से  बेचारा भाग निकला‌। तीसरे ने तो आत्म समर्पण कर दिया कि यह मेरे बस का नहीं है। मैं बिना बिल्लो रानी के ही रह लूंगा। 

बिल्लो रानी एक परम सुंदरी है। ढेर सारे प्रेमी तो भौकाल बनाये लेकिन बिल्लो को अपना नहीं बना सके। अब बेचारी अकेले ही जीवन काट रही है। 

बिल्लो रानी को अपना बना लेने के लिए ढेर सारे लोग वकालत करते हैं कि कहो तो जान दे दूं। पर आज तक कोई जान नहीं दे पाया। बिल्लो रानी भी उसी से ब्याह करेगी जो उसके लिए जान देगा। बिल्लो रानी अभी कुंवारी है। उसके लिए वही वर होगा जो उसके लिए जान देने को तैयार होगा। 

— जयचन्द प्रजापति ‘जय’

*जयचन्द प्रजापति

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