ग़ज़ल
उल्फ़तों को उछाल दे या रब
नफ़रतों को ज़वाल दे या रब
तम से मुझको निकाल दे या रब
रौशनी की मशाल दे या रब
जाह दे दे जलाल दे या रब
अपने रस्ते पे डाल दे या रब
इल्तिज़ा हाथ जोड़ कर इतनी
हमसफ़र खुश ख़याल दे या रब
एक तिनका हराम का मत दे
मुझको रोज़ी हलाल दे या रब
जाह दे मत जलाल दे या रब
अपने रस्ते पे डाल दें या रब
काम सब के जहान में आऊँ
मुझको इतना कमाल दे या रब
— हमीद कानपुरी
