बारिश का इंतजार
हर मन कर रहा बेसब्री से बारिश का इंतजार,
कब बरसेगी अंबर से अमृत की “आनंद” धार,
नीले नभ में कब घिरेगी काली-काली बदली,
कब घटेगी तपन मन में बजेगी राहत की डफली ।
झूमेंगे मीठा शोर करते कब फिर से खेत खलिहान,
कब मिलेगा भंयकर गर्मी से सबको प्रभावी निदान,
पंछी चाहते करना गगन की दूर तलक लंबी सैर,
कब भीगेंगे टिपटिप बारिश में छप-छप करते पैर ।
सुखे पेड़ सुखा धरा का ऑंगन प्यासा-प्यासा मन,
कब चलेगी रोमकूपों को गुदगुदाती ठंडी-ठंडी पवन,
पंख फैला नाचेंगे मोर कब गीत सुहाना गाएंगी कोयल,
कब मिलेंगा क्लांत आत्मा को राहत भरा शीतल जल ।
छाया है सुनापन शिथिल शरीर व्याकुलता भी अपार,
कब सुनोगें जगदीश्वर धरतीवासियों की विनय पुकार,
नौ तपा के दिन बीते अब धीमी करो किरणों की आग,
कब सुनाओगें सावन है आने वाला वो खुशी का राग ।
बच्चे सुनना चाहते हैं पहली बारिश की बूॅंदों का शोर,
कब बिखरेगी वो सौंधी खुशबू मिटृटी की चारों ओर,
बॉंट जोंहतीं अखियॉं कब धरती का भीगेंगा ऑंचल,
तैरेगी कागज की नाव कब गरजेंगे बिजुरि संग बादल ।
— मोनिका डागा “आनंद”
