नन्हा मुन्ना बाल है
नन्हा मुन्ना बाल है, आँखों में अरमान।
पेड़ों की हर डाल से, करता है पहचान।।
डाली थामे देखता, पत्तों का संसार।
प्रकृति माँ की गोद में, पाता है वह प्यार।।
फल को छूकर पूछता, कैसे हुए जवान।
चुपके-चुपके पेड़ भी, देते उसको ज्ञान।।
छोटे-छोटे हाथ हैं, सपने हैं भरपूर।
सीख रहा है खेल में, जीवन के दस्तूर।।
पौधे, पत्ती, फूल सब, इसके सच्चे मित्र।
इनसे ही खिलता रहे, बचपन का यह चित्र।।
पेड़ लगाओ प्रेम से, यह प्रकृति का मान।
नन्हा बालक दे रहा, यही संदेश महान।।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
