सामाजिक

फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड भी ध्यान दे

आजकल फिल्मों  में आपत्तिजनक और गाली-गलौज वाली भाषा एवं सिगरेट ,शराब का खुलेआम अभिनय का प्रयोग किए जाने लगा है।जबकि महिमामंडन पर कई वर्षों पूर्व ही रोक लगाई जा चुकी थी।कई फिल्मों में इसको फिल्माने के बाद पर्दे पर हानिकारक शब्द का उपयोग कर चेतावनी दी भी जाने लगी है।कुछ भी हो जब इनके प्रयोग पर सेंसर बोर्ड भी जाने क्यूँ चुप है।शराब,सिगरेट, भद्दी गाली से भरी फिल्में कमाई तो कर लेती है।युवा पीढ़ी पर इसका कितना प्रभाव पड़ेगा इसकी किसी को कोई चिंता नही है।फिल्मों को प्रभावी बनाने हेतु इन चीजों का प्रयोग बंद हो।परिवार में बैठ कर महंगे टिकट लेकर लोग स्वस्थ मनोरंजन चाहते है।सेंसर बोर्ड वयस्कों के लिए ग्रेड इस्तेमाल करती है वैसे ही इनके लिए भी ग्रेड बनाई जावे। फिल्मों में ऐसी भाषा को खुलेआम अनुमति देने पर रोक लगे। मनोरंजन के नाम पर अपशब्दों को सामान्य बनाना सामाजिक ढांचे के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

— संजय वर्मा “दृष्टि”

*संजय वर्मा 'दृष्टि'

पूरा नाम:- संजय वर्मा "दॄष्टि " 2-पिता का नाम:- श्री शांतीलालजी वर्मा 3-वर्तमान/स्थायी पता "-125 शहीद भगत सिंग मार्ग मनावर जिला -धार ( म प्र ) 454446 4-फोन नं/वाटस एप नं/ई मेल:- 07294 233656 /9893070756 /antriksh.sanjay@gmail.com 5-शिक्षा/जन्म तिथि- आय टी आय / 2-5-1962 (उज्जैन ) 6-व्यवसाय:- ड़ी एम (जल संसाधन विभाग ) 7-प्रकाशन विवरण .प्रकाशन - देश -विदेश की विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं में रचनाएँ व् समाचार पत्रों में निरंतर रचनाओं और पत्र का प्रकाशन ,प्रकाशित काव्य कृति "दरवाजे पर दस्तक " खट्टे मीठे रिश्ते उपन्यास कनाडा -अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व के 65 रचनाकारों में लेखनीयता में सहभागिता भारत की और से सम्मान-2015 /अनेक साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित -संस्थाओं से सम्बद्धता ):-शब्दप्रवाह उज्जैन ,यशधारा - धार, लघूकथा संस्था जबलपुर में उप संपादक -काव्य मंच/आकाशवाणी/ पर काव्य पाठ :-शगुन काव्य मंच

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