गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

अब गुज़र होता नहीं तेरे बिना।
अब नहीं मिलती खुशी तेरे बिना।।

किस नगर तू ही बता अब जा रहा।
अब नहीं मिलती डगर तेरे बिना।।

तू बसा धड़कन चले सुन बात ही।
साँस आती ही नहीं तेरे बिना।।

आज जोगन मैं अभी तू सोच ले।
इस विरह में मैं तपी तेरे बिना।।

फूल लगते आज चिंगारी जली।
आग में तो मैं जली तेरे बिना।।

इस दशा में क्या करूँ सेवा बता।
चल न पाऊँ मैं कहीं तेरे बिना।।

प्यार छूटा दिल अभी टूटा यहीं।
कुछ नहीं है जिन्दगी तेरे बिना ।।

अब खुशी ही कब मिलेगी बोल दे।
मौत आती ही नहीं तेरे बिना।।

— रवि रश्मि ‘अनुभूति’

Leave a Reply