वृक्षों की रक्षा का, संकल्प का विधान है त्यौहार ‘हरेला’
देवभूमि की शान है त्यौहार ‘हरेला’,
प्रकृति का वरदान है त्यौहार ‘हरेला’,
मिट्टी के कण-कण में बसी,
खुशहाली की पहचान है ‘हरेला’।
सावन की फुहारें जब धरती को नहलाती हैं,
खुशियों की सौगातें अपने संग ये लाती हैं,
टोकरियों में सजे अंकुर, प्यारे,प्यारे
आशाओं का मान है त्यौहार ‘हरेला’।
देवभूमि की शान है त्यौहार ‘हरेला’,
प्रकृति का वरदान है त्यौहार ‘हरेला’।
पर्वतों की गोद में, खिलते सुंदर फूल,
हरियाली के रंग निराले, भाते मन के मूल,
आओ हम सब मिलकर, आज ये प्रण करें,
नए-नए पौधे रोपें, वृक्षों की रक्षा करें,
संकल्प का विधान है त्यौहार ‘हरेला’,
देवभूमि की शान है त्यौहार ‘हरेला’,
प्रकृति का वरदान है त्यौहार ‘हरेला’।
बड़ों का मिले आशीष, घर-आंगन महक उठे,
नेह और प्रेम के धागों से, जीवन दमक उठे,
हमारी जड़ों की गहराई, संस्कारों का मान है,
परंपराओं की अमूल्य, ये सुंदर पहचान है,
देवभूमि की शान है त्यौहार ‘हरेला’,
प्रकृति का वरदान है त्यौहार ‘हरेला’।
आने वाली पीढ़ियों को, हरियाली का उपहार दें,
पावन मिट्टी को पूजें, प्रकृति को भरपूर प्यार दें,
सुख-समृद्धि की बयार, हम सब मिलकर बहा दें,
जीवन का अभिमान है त्यौहार ‘हरेला’,
“मुश्ताक़” देवभूमि की शान है त्यौहार ‘हरेला’
— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह ‘सहज़’
