कविता

जंग जारी है…

जंग जारी है…
अंग्रेजों के चले जाने से ही
खत्म नहीं हो जाती
आजादी की लड़ाई,
अभी भी भरे पड़े हैं
इस देश के भीतर
बहुत से अंग्रेज़परस्त लोग,
व्यक्तिगत लालसा पाले लोग।

लाखों हैं जिन्हें नहीं पता
बमुश्किल मिली आजादी की कीमत,
बुनियाद हिलाने बैठे हैं
दीमक पर दीमक।

हमें नहीं शिकायत
वतन के शूरवीरों से,
पर कैसे भूल जाएँ कि
हो रहा है देश घायल
भ्रष्टाचार, साम्प्रदायिकता,
जातिवाद, आतंकवाद
और पाखंड जैसे तीरों से।

शकुनि जैसे लोग
चल रहे रह-रहकर
चाल पर चाल,
आजादी के इतने वर्षों बाद भी
देश हो रहा निढाल।

बेरोजगारी बढ़ रही
जैसे सुरसा का मुख,
कौन सुने
नौजवानों के दुख?

स्वतंत्रता की जंग
अभी भी जारी है,
बाहर आ ही जाने है खबर
किसकी देशद्रोहियों से
गहरी यारी है।

— राजेन्द्र लाहिरी

राजेन्द्र लाहिरी

पामगढ़, जिला जांजगीर चाम्पा, छ. ग.495554

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