हास्य व्यंग्य

हास्य-व्यंग्य – थोथा चना बाजे घना

एक लेखक मेरे एक साहित्यिक कथन पर उनकी आत्मा फट गयी। आंखें बड़ी-बड़ी हो गयी। हेय दृष्टि से देखने लगे। कसाई जैसे बलि के बकरे को देखता है वैसी ही तीक्ष्ण दृष्टि हमारे उपर उनकी थी। मुझे हलाल करने की पूरी नीति अपना डाली। मैं भौचक्का होकर देखकर रहा था। 

मेरा मन भी चुलबुलाता रहता है इसलिए फेसबुक पर लिख देता हूँ। अब वे अपना हिंदी के प्रति संपूर्ण समर्पण दिखाते नजर आये। हिंदी के प्रति ऐसा समर्पण दिखा रहे थे कि जैसे साहित्य के लिए प्राणों की आहुति दे देंगे। उनके साहित्य के स्नेह देखकर मैं तो भीगी बिल्ली बन गया। 

मुझे जो भी जी में आया वे बकते रहे जैसे कुत्ता अपने सामने कुत्ते को देखकर भौंकता रहता है। लेखक महोदय भी खूब भौंके। तीन चार लीटर पानी पी-पीकर भौंके। गला सूख रहा थी। कोल्डड्रिंक भी पीकर भौंके। इससे जी नहीं भरा। बरफ की सिल्ली छाती पर रखकर भौंकना शुरू कर दिये। तब तक भौंकते रहे जब तक गला बैठने की तैयारी नहीं हुई। 

खूब टिप्पणी पर टिप्पणी दिये जा रहे थे। ऐसे भारी-भारी वाक्यों को फेंक रहे थे। मेरी तो एक भुजा टूट गयी। मेरे दो दांत टूट गया। मेरी जिह्वा भी लड़खड़ाने लगी। ऐसे लगने लगा जैसे मैं नींद की दवा खा ली है। अपने को हिंदी की विद्वत्ता की श्रेणी में बार-बार रख रहे थे। एक बार तो मुर्छित हो गया। कुछ समझदार साहित्यकारों ने मुंह पर पानी का छींटा मार कर होश में लाये। 

जब मुझे होश आया तो देखा कि हिंदी के मर्मज्ञ लेखक महोदय हिंदी के बजाय अंग्रेजी में टाइपिंग करके टिप्पणी झोंक रहे थे। हिंदी में अंग्रेजी को खुब घुसेड़-घुसेड़ कर खूब मेरी आलोचना का सुर बांधा था। ऐसी उद्दंडता बर्दाश्त के बाहर था। इतना बड़ा हिंदी का अपमान। क्या हिंदी के शब्दों की कमी थी जो महाशय हिंदी में अंग्रेजी घुसेड़ रहे थे। 

‘थोथा चना बाजे घना’ लोकोक्ति का मुख्य भाव समझ आ गया। मेरे गुरूजी बचपन में समझाये थे। कम समझ आया था। आज महोदय ने जिस तरह से डींग मारी, सारा सच सामने आ गया। मैं भी शब्दों का तेजाब उसके उपर फेंक दिया। 

मैंने कहा — जब हिंदी कमजोर है, अंग्रेजी शब्दों तथा टाइपिंग से काम चला रहे हो। काहे के हिंदी लेखक। उसकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गयी। जब हिंदी नहीं आती तो काहे हिंदी का घंटा बजा रहे हो। तब से फेसबुक से गायब है। ढ़ूंढ़ रहा हूँ। मिले तो निम्न पते पर मे भेज देना। उनकी हजामत बनाना है। 

— जयचन्द प्रजापति ‘जय’

*जयचन्द प्रजापति

प्रयागराज मो.7880438226 jaychand4455@gmail.com

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