नन्ही मुस्कान
नन्हे हाथों में सजे,
सपनों के संसार।
पापा संग मुस्कान यह,
करती मन गुलज़ार॥
नटखट आँखें बोलतीं,
भोले-भोले बोल।
इनकी प्यारी शरारतें,
मन में भरतीं घोल॥
पापा की यह गोद है,
सबसे सुंदर धाम।
नन्हा बच्चा पास हो,
खिल उठता हर काम॥
हँसी तुम्हारी फूल-सी,
मन में भरे बहार।
तुमसे ही रोशन लगे,
अपना यह संसार॥
नन्हे पग जब चल पड़े,
घर में बजे उमंग।
तुतली बोली सुन पड़े,
जीवन के मधुर रंग॥
पापा बनकर घोड़ा जो,
बच्चे को दे सवारी।
हँसता जाए नन्हा मन,
दुनिया लगे न्यारी॥
कंधों पर जब बैठकर,
देखे अपना गाँव।
नन्ही आँखों में बसे,
सपनों वाली छाँव॥
प्यारे बच्चे तुम रहो,
हँसकर खेलो खेल।
जीवन में हर पल मिले,
खुशियों का सुंदर मेल॥
— डॉ. प्रियंका सौरभ
