कविता

आप अपने ख़ुद के रचयिता हैं

मिट्टी ने कभी नहीं पूछा—
“मुझे क्या बनना है?”
बस किसी शिल्पी के हाथों में
ख़ुद को सौंप दिया।

हर चोट जो उस पर पड़ी,
एक नया आकार देती गई,
हर खुरचती हुई रेखा
उसकी पहचान लिखती गई।

ज़िंदगी भी कुछ ऐसी ही है—
कुछ लोग हमें तोड़ते हैं,
कुछ हालात हमें झकझोरते हैं,
और कुछ दर्द
हमें भीतर से तराशते हैं।

पर फ़र्क़ इतना है—
हम केवल मिट्टी नहीं हैं,
हमारे हाथ में औज़ार भी है।

हम तय कर सकते हैं
कि दर्द को शिकायत बनाना है
या अनुभव,
हार को अंत मानना है
या एक नई शुरुआत।

जो चेहरा आज आईने में है,
वह सिर्फ़ उम्र की कहानी नहीं—
वह उन फैसलों की तस्वीर है
जो हमने अकेले में लिए,
उन आँसुओं की गवाही है
जिन्हें किसी ने नहीं देखा,
और उन संघर्षों की निशानी है
जिन्हें हमने मुस्कुराकर सहा।

इसलिए किसी और के हाथों
अपनी तक़दीर मत सौंपो।
दुनिया चाहे जितनी बार
तुम्हें अधूरा कहे—
अपने भीतर के शिल्पी को
ज़िंदा रखना।

क्योंकि अंत में
लोग तुम्हारी कहानी नहीं लिखेंगे,
तुम्हें ही अपनी कहानी लिखनी होगी।

तुम मिट्टी भी हो,
तुम हाथ भी हो,
तुम औज़ार भी हो—

और सबसे बढ़कर,
तुम अपने ख़ुद के रचयिता हो।

— मदन मोहन सक्सेना

*मदन मोहन सक्सेना

जीबन परिचय : नाम: मदन मोहन सक्सेना पिता का नाम: श्री अम्बिका प्रसाद सक्सेना जन्म स्थान: शाहजहांपुर .उत्तर प्रदेश। शिक्षा: बिज्ञान स्नातक . उपाधि सिविल अभियांत्रिकी . बर्तमान पद: सरकारी अधिकारी केंद्र सरकार। देश की प्रमुख और बिभाग की बिभिन्न पत्रिकाओं में मेरी ग़ज़ल,गीत लेख प्रकाशित होते रहें हैं।बर्तमान में मैं केंद्र सरकार में एक सरकारी अधिकारी हूँ प्रकाशित पुस्तक: १. शब्द सम्बाद २. कबिता अनबरत १ ३. काब्य गाथा प्रकाशधीन पुस्तक: मेरी प्रचलित गज़लें मेरी ब्लॉग की सूचि निम्न्बत है: http://madan-saxena.blogspot.in/ http://mmsaxena.blogspot.in/ http://madanmohansaxena.blogspot.in/ http://www.hindisahitya.org/category/poet-madan-mohan-saxena/ http://madansbarc.jagranjunction.com/wp-admin/?c=1 http://www.catchmypost.com/Manage-my-own-blog.html मेरा इ मेल पता: madansbrac@gmail.com ,madansbarc@ymail.com

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