कविता

तेरी परछाईं!

विधा- कविता
शीर्षक- तेरी परछाईं!

मेरे साथ चलती है मेरी परछाईं,
लगता है साथ मेरे तू चलती आई,
आज क्यों दूर-सी खिसक रही है,
ग़मज़दा है तेरी तरह तेरी परछाईं!

खाई थी कसमें तूने बन कर रहूँगी,
सात जन्मों तक सनम तेरी परछाईं,
कई मोड़ मुड़ गई इसी जन्म में,
अलहदा है तेरी तरह तेरी परछाईं!

तन्हाइयों में साथ रहती थी मेरे,
हमदर्द-रहबर बनकर तेरी परछाईं,
जाने क्यों फिसलती जा रही है,
रंजीदा है तेरी तरह तेरी परछाईं!

करीब लाई थी किस्मत साथ हमें,
किस्मत ही शायद ला रही जुदाई,
चंद लम्हों तक तो साथ रहने दे इसे,
अलविदा न करे तेरी तरह तेरी परछाईं!
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

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