लघुकथा

अब पछताए क्या होत है…!

विधा- लघुकथा
शीर्षक- अब पछताए क्या होत है…!

आजकल लोग अच्छे कम और अच्छे होने का ढोंग ज्यादा करते हैं. स्मिता ऐसे ही लोगों में से थी. नाम के अनुरूप हर पल उसके चेहरे पर स्मित होते हुए भी अंतर्मन की कुढ़न साफ झलकती थी.
पड़ोसी के घर की एक मंजिल क्या बढ़ी, उसके सीने पर सांप लोटने लगे. उनके पास नई बड़ी गाड़ी क्या आई, बिच्छू डंक मारने लगे. बधाई देते समय भी उसकी आंखों की तीर-सी चुभन छिप नहीं सकी! उनका रुख भी बेरुखी वाला होना स्वाभाविक था.
स्मिता की बेटी की शादी होने वाली थी. सबको पता था कि सब मेहमानों को होटल में ठहराने की उसकी हैसियत नहीं थी, लेकिन उन पड़ोसी ने तो क्या किसी भी पड़ोसी ने कमरा देने का प्रस्ताव नहीं रखा. सांप-बिच्छू से कौन पाला रखे!
अब उसे समझ आ गया था कि अच्छा-सच्चा व्यवहार ही काम आता है और सम्मान भी दिलाता है, लेकिन अब पछताए क्या होत है…!
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

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