गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आपके बिन कदम लड़खड़ाने लगे।
राह के मोड़ भी अब सताने लगे।

साथ जब आप हो है हँसी ज़िंदगी।
ख्वाब सच हो मुझे गुदगुदाने लगे।

आपके नाम से है धड़कता ये दिल ।
गीत होंठों पे खुद गुनगुनाने लगे।

आपसे दूर होकर ये जाना सनम।
ज़ख़्म भीतर केफिर से सतानें लगे।

आपकी आहटों का भरोसा रहा।
हम अँधेरों में दीपक जलाने लगे।

आपकी बात जब याद आई कभी।
शुष्क नयनों में आँसू सजाने लगे।

— मंजूषा श्रीवास्तव ‘मृदुल’

*मंजूषा श्रीवास्तव

शिक्षा : एम. ए (हिन्दी) बी .एड पति : श्री लवलेश कुमार श्रीवास्तव साहित्यिक उपलब्धि : उड़ान (साझा संग्रह), संदल सुगंध (साझा काव्य संग्रह ), गज़ल गंगा (साझा संग्रह ) रेवान्त (त्रैमासिक पत्रिका) नवभारत टाइम्स , स्वतंत्र भारत , नवजीवन इत्यादि समाचार पत्रों में रचनाओं प्रकाशित पता : 12/75 इंदिरा नगर , लखनऊ (यू. पी ) पिन कोड - 226016

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