सामाजिक

विश्व शांति – सपना या संकल्प?

विधा- आलेख
शीर्षक- विश्व शांति – सपना या संकल्प?

विश्व शांति को महज सपना या संकल्प नहीं कहा जा सकता. विश्व शांति एक ऐसा दृढ़ संकल्प है जिसे निरंतर प्रयासों, आपसी संवाद और मानवीय मूल्यों के जरिए वास्तविकता में बदला जा सकता है, भले ही यह एक आदर्शवादी सपना प्रतीत होता हो.

सपना वह होता है जो बंद आँखों से देखा जाता है और सुबह तक धुंधला हो जाता है. इसके विपरीत, विश्व शांति जीवन और समाज की एक अनिवार्य आवश्यकता है, केवल कोरी कल्पना नहीं. यदि शांति को सिर्फ एक सपना मान लिया जाए, तो यह मान लेना होगा कि हिंसा और नफरत हमेशा बनी रहेंगी. मानवता इसे स्वीकार नहीं करती.

प्रश्न उठता है कि विश्व शांति को सपना क्यों कहा जाए! इसके कई कारण हैं. दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी युद्ध, संघर्ष और हथियारों की होड़, स्वार्थ और असहिष्णुता के कारण देशों और समाजों के बीच धार्मिक, जातीय और वैचारिक मतभेद और प्रतिदिन आने वाली नकारात्मक खबरें और हिंसा के नए रूपों के कारण अस्थिरता.

अब विचार करना होगा कि विश्व शांति संकल्प कैसे है? भारतीय चिंतन के अनुसार, सच्ची शांति की शुरुआत व्यक्ति के मन और उसकी सकारात्मक सोच से होती है. संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठन और वैश्विक नागरिक बातचीत, न्याय तथा करुणा के जरिए इसे सहयोग और संवाद के जरिए संभव बनाने में जुटे हैं. ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना अपनाकर हर दिन छोटे-छोटे दयालु कदम उठाकर सामूहिक प्रयास करना इसे साकार करता है.

निष्कर्ष यह है कि विश्व शांति मानव सभ्यता का केवल सुंदर सपना नहीं, बल्कि आज की सबसे बड़ी वैश्विक आवश्यकता और सामूहिक संकल्प है. विश्व शांति केवल एक सपना नहीं है, बल्कि यह हम सबका एक दृढ़ संकल्प है, जिसे हमें हर पल निभाने की आवश्यकता है.
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

Leave a Reply