कविता

।। पितृपक्ष।।

आज से शुरू हो गया पितृ पक्ष
पूर्वजों के प्रति समर्पित पखवारा
पर इतना जरूर जहन में रखें
बीता हुआ पल न लौटे दोबारा।

माता-पिता साक्षात् ईश्वर का रूप
वो ही हमको दुनिया में लाने वाले
करो उनकी हर आज्ञा शिरोधार्य
न करना कभी वृद्धाश्रम के हवाले।

जो आज पास हैं, आपके साथ हैं
उनका अच्छे से ख्याल रखिये
साथ बिताइये कुछ पल सुकून के
दिल में फिर न कुछ मलाल धरिये।

खुशनसीब हैं वो जिनके सिर पर
माता-पिता का है वरद हस्त
सदा चाहते वह बच्चों का भला
हम भले ही रहें उनके प्रति सख्त ।

पूरी हों उनकी छोटी-छोटी ख्वाहिश
इतने में ही वह प्रसन्न हो जाएंगे
जाने के बाद आप कुछ भी करो
संभवतः सब व्यर्थ ही पाएंगे।

माता-पिता हों या अन्य बुजुर्ग-जन
भूल से भी उपेक्षा होने न पाए
उनकी डांट भी समझें प्रसाद तुल्य
सहर्ष स्वीकारें और गले से लगाएं।

दान-पुण्य चाहे जितना भी करिये
इसमें किसी को भला क्या आपत्ति
जीते जी लेकिन किया जो अनादर
किस काम की फिर ऐसी सम्पत्ति।

पितृपक्ष का सबको है यही सन्देश
हृदय को सदा संवेदनशील रखें
बड़ों के सम्मान का रखें ध्यान
बोलने से पहले शब्द जांचें -परखें।

— नवल अग्रवाल

*नवल किशोर अग्रवाल

इलाहाबाद बैंक से अवकाश प्राप्त पलावा, मुम्बई

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