मुक्तक/दोहा

करें वहीं हम वास

सम्मान जहाँ हो वहाँ, मन को मिले निवास।
प्रेम-स्नेह की छाँव में, करें वहीं हम वास॥

सत्य का जहाँ मान हो, निर्मल हो विश्वास।
ऐसे सुंदर लोक में, करें वहीं हम वास॥

छल न जहाँ हो, ना कपट, मन में रहे उजास।
सद्भावों की भूमि पर, करें वहीं हम वास॥

परिश्रम का जहाँ मिले, श्रम को पूरा दाम।
मेहनत की उस भूमि को, दें जीवन का नाम॥

साथ-साथ हो सब जहाँ, हो अपनापन खास।
मिल-जुलकर उस गाँव में, करें वहीं हम वास॥

जहाँ बुजुर्गों का सदा, होता हो सम्मान।
ऐसे घर की चौखटें, लगतीं स्वर्ग समान॥

जहाँ बच्चे खेलें सदा, लेकर हँसी-उल्लास।
बचपन वाली छाँव में, करें वहीं हम वास॥

जहाँ प्रकृति मुस्कान दे, हरियाली हो पास।
पेड़ों की शीतल छाँव में, करें वहीं हम वास॥

मन को जहाँ सुकून हो, मिट जाए हर त्रास।
शांति भरे उस देश में, करें वहीं हम वास॥

जहाँ पड़ोसी बन सकें, सुख-दुख के आधार।
ऐसे सुंदर गाँव में, रहे प्रेम-परिवार॥

जहाँ नफरती बीज को, कोई दे न प्रकाश।
प्रेम-सद्भावों के नगर, करें वहीं हम वास॥

जहाँ ज्ञान की ज्योति हो, शिक्षा हो विश्वास।
विद्या वाली भूमि पर, करें वहीं हम वास॥

जहाँ अन्नदाता सदा, पाता हो सम्मान।
उस धरती की गोद में, जीवन हो बलवान॥

जहाँ नदी निर्मल बहे, निर्मल हो आकाश।
जल-जंगल के संग में, करें वहीं हम वास।।

सब धर्मों का हो जहाँ, मन में सम सम्मान।
ऐसी पावन भूमि को, मानें अपना धाम।।

जिन रिश्तों में प्रेम हो, दिल में हो विश्वास।
अपनों की उस जिंदगी, करें वहीं हम वास॥

जहाँ मिले ईमान की, मेहनत को पहचान।
उस समाज में जिंदगी, हो सच्ची आसान॥

जहाँ मिले दो वक्त की, रोटी और निवास।
श्रम की ऐसी छाँव में, करें वहीं हम वास॥

जहाँ मनुष्य मनुष्य को, समझे अपना खास।
प्रेम-सत्य के देश में, करें वहीं हम वास॥

— डॉ. प्रियंका सौरभ

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh

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