लघुकथा

सम्मान

“इतनी रात हो गयी है, तेरे घर पर कोई कुछ कहेगा तो नहीं?” पीछे बैठे मित्र ने  मोटर-साइकिल से उतरते हुए पूछा।

इस प्रश्न को सुनते ही वह झल्ला गया और लड़खड़ाती जुबान से कहा, “शराब ही तो पी है… किसी का मर्डर तो नहीं किया… आज सुबह से शाम तक… अपने बाप का… भाषण सुना है… लेकिन अब कुछ कहे… मैं भी बताता हूँ… तू जा हॉस्टल वार्डन को नींद नहीं आ रही होगी।” कहकर वह मोटर-साइकिल को तेज़ गति से चला कर कुछ मिनटों में ही अपने घर पहुँच गया।

उसने मोटर-साइकिल को लगभग पटकते हुए रखा और दरवाज़े की घंटी तीन-चार बार लगातार बजाई, लेकिन दरवाज़ा घंटी की आवाज़ ख़त्म होने से पहले ही खुल गया।

दरवाज़ा उसकी माँ ने खोला था, उसे देखते ही व्याकुलता से पूछा, “कहाँ था अब…” कहते-कहते वह चुप हो गयी, शायद उसके पिता के डर की वजह से।

अंदर घुसते ही उसने देखा कि दरवाज़े के ठीक सामने कुर्सी पर बैठे हुए उसके पिता अपलक उसकी तरफ ही देख रहे थे, वह भी अपनी लाल हो चुकी आँखों से अपने पिता की आँखों में झाँकने का प्रयास करने लगा। उसके पिता कुर्सी से खड़े हुए और धीरे-धीरे चलते हुए उसके पास पहुंचे और वह सिर झुका कर ज़मीन को घूरने लगा।

पिता ने उसके कंधे पर हाथ रखा, हाथ का स्पर्श पाते ही उसके पूरे शरीर में कंपकंपी फ़ैल गयी, पिता ने गंभीर स्वर में कहा, “खाना खा लो, माँ को भी सोना है।”

कहकर वह आगे बढ़ गए, वह वहीँ खड़ा रहा। पिता के क़दमों की आवाज़ के साथ उसके दिल की धडकन बढती जा रही थी, और फिर उसे कमरे का दरवाज़ा बंद होने का स्वर सुनाई दिया। दरवाज़े के बंद होते ही उसने अपना सिर उठाया और कहा,

“जी पापा…”

डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी

डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी शिक्षा: विद्या वाचस्पति (Ph.D.) सम्प्रति: सह आचार्य (कम्प्यूटर विज्ञान) साहित्यिक लेखन विधा: कविता, लघुकथा, बाल कथा, कहानी 18 पुस्तकें प्रकाशित, 10 संपादित पुस्तकें 52+ शोध पत्र प्रकाशित 70+ राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त फ़ोन: 9928544749 ईमेल: writerchandresh@gmail.com डाक का पता: 3 प 46, प्रभात नगर, सेक्टर-5, हिरण मगरी, उदयपुर (राजस्थान) – 313 002 यू आर एल: https://sites.google.com/view/chandresh-c/about ब्लॉग: http://laghukathaduniya.blogspot.in/

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