कविता

आज की नारी

मर्दों से मुकाबला करती नारी 

शराब और सिगरेट पीती है 

उसका विरोध कैसे करूँ 

करू भी तो जायज करू कैसे 

तनाव से बचने सकून के लिए 

मर्द पी सकता है 

दारू और सिगरेट

तो पीछे क्यों रहे नारी 

जो कही जाती थी अबला कभी 

अब अबला से सबला हो गयी वो 

उसको भी तो चाहिए आनंद 

तनाव से निजात पाने के साधन 

क्यों न पिए वह भी 

सिगरेट और दारू 

फिर करे मौज मस्ती और धमाल

*ब्रजेश गुप्ता

मैं भारतीय स्टेट बैंक ,आगरा के प्रशासनिक कार्यालय से प्रबंधक के रूप में 2015 में रिटायर्ड हुआ हूं वर्तमान में पुष्पांजलि गार्डेनिया, सिकंदरा में रिटायर्ड जीवन व्यतीत कर रहा है कुछ माह से मैं अपने विचारों का संकलन कर रहा हूं M- 9917474020

Leave a Reply