बेटी का बाप हूँ
बेटी का बाप हूँ
हाँ, एक बेटी का बाप हूँ
और मुझे वंश की दुहाई न दो
न उद्धार की
न मुखाग्नि की
मैं कोई विशेष नहीं…
मुझे कोई डर नहीं कि मेरे राज्य पर
पड़ोसी राजा चढ़ाई कर देगा
मैं कोई राजा थोड़े ही हूँ
सिर्फ एक बेटी का बाप हूँ।
कौन कहता है कि
बेटा बुढ़ापे की लाठी होता है
अरे मैंने तो पाँच-पाँच बेटों के बाप को
सड़कों पर ठोकरें खाते देखा है
वृद्धाश्रमों में तिल-तिल मरते देखा है।
साहब, मैं बेटी का बाप हूँ
और नहीं डरता अब
क्योंकि बेटियाँ
बेटों से कम नहीं…!
— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
