सजग रहे तलवार
चाहे हो वह चीन या, हो वह पाकिस्तान।
अंधा अगर यकीन हो, ले लेता है जान॥
मीठे बोलों में छिपे, कितने गहरे घाव।
चेहरा पढ़ना सीखिए, समझो मन के भाव॥
सीमा पर विश्वास की, मत करना तकरार।
शांति रहे व्यवहार में, सजग रहे तलवार॥
मित्र वही जो वक्त पर, दे संकट में साथ।
केवल मीठे बोल से, सुधरे कब हालात॥
दुश्मन की मुस्कान पर, मत करना विश्वास।
अवसरवादी सोच का, अलग- थलग इतिहास॥
आँख मूँदकर मत चलो, दुनिया के व्यवहार।
हित की भाषा बोलते, बदल-बदल किरदार॥
शांति चाहिए देश को, शक्ति रहे तैयार।
निर्बल की आवाज़ को, कौन सुने संसार॥
जो कल तक था मित्रवर, आज बना अनजान।
स्वार्थ बदलते ही बदल, जाते हैं इंसान॥
कूटनीति के खेल में, रखना सदा विवेक।
हर समझौते में छिपा, होता कोई लेख॥
सीमा केवल रेख नहीं, जन-जन का अभिमान।
इसकी रक्षा के लिए, तत्पर रहे जवान॥
इतिहासों से सीख लो, मत दो भूल सुधार।
धोखे की हर चाल का, रखना सदा विचार॥
ताकत केवल शस्त्र में, ताकत में विज्ञान।
आत्मनिर्भरता से बने, भारत की पहचान॥
रिश्तों की बुनियाद में, सच का हो आधार।
झूठ टिकेगा कब तलक, चाहे हो व्यवहार॥
दुनिया के बाजार में, बिकते कई उसूल।
अपने हित की राह में, मत जाना तुम भूल॥
दुश्मन को पहचानना, पहली जीत समान।
सौरभ केवल शोर से, नहीं बने बलवान॥
संयम अपनी शक्ति है, साहस अपनी शान।
दोनों जिसके पास हैं, ऊँचा उसका मान॥
धोखे से जो जीतते, हारें अंत में लोग।
सत्य और विश्वास से, मिटता मन का रोग॥
भारत की पहचान है, साहस और विचार।
शांति, बल, स्वाभिमान है, तीनों का आधार॥
आँखों में सपने रहें, मन में रहे विवेक।
देशहित के प्रश्न पर, समझौता ना एक॥
— डॉ. सत्यवान सौरभ
