दीप अपनी माटी के…
आओ हम संकल्प करें,
दीपावली के पावन पर्व में,
नेह दीप हर घर जलें,
प्रेम गंग हर दिल में बहें।।
दीप केेवल स्वदेशी हो,
अपनी माटी के हो,
अपनों को खुशियां मिलें,
उल्लास हर दिल खिलें।।
अँधियारी गलियों में,
प्रदीप हो दीप ऐसा,
कोना-कोना जगमगायें,
झिलमिल तारे सजाये।।
दीन-हीन के घर आँगन,
मेवा मिठाई से महके,
तृप्त हो हर दिल,
खुशियां रिमझिम आए।।
दीप से दीप जले,
हर द्वार वंदनवार हो।
सुंदर सी रंगोली अनुपम,
उल्लसित संसार हो।।
कोई वंचित न रहें
आनंद उत्सव पर्व में,
मनायें सब मिल त्योहार,
प्रभु कृपा छत्र छाँव में।।।
