खुद को बदल न पाती हूँ
अक्सर और आदतन, निद्रा के आगोश में जाने से पहले, ले बैठती हूँ… दिनभर के लेखे – जोखे की किताब
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Read Moreहिन्दी पर मेरी क्षणिका ****************** अजब परिहास कहलाए मातृभाषा फिर भी काट रही वनवास अंजु गुप्ता
Read Moreमकड़ी के जाले ************ न अभिमान कर… वर्तमान का, और इसकी ऊंचाइयों का ! कल भूतकाल बन… ये भी रखा
Read Moreकभी बँद करूँ मैं मुट्ठी, तो कभी बँद मुट्ठी मैं खोलूँ ! क्या ढूंढ़ते हैं इनमें, ये राज कैसे बोलूं
Read Moreबरसों नहीं, जिन्हें जीया मैंने जन्मों, उन ख्वाबों के कत्ल में… मुझे तू नज़र आया l रेत के महल जैसे,
Read Moreव्यथित मन और लाचार जज्बात… बिछोह संतान का सह न पाएँ ! हर आहट पर,,, लिए आस वृद्धाश्रम के दर
Read Moreचुपके से ना जाने कब से मेरी इन चंचल चितवन में, आन बसे हो… तुम चितचोर ! हो खुद से
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