क्षणिका : मौन
मौन बर्फ़ से सर्द, हो चुके हैं रिश्ते पिघलाए, सहलाए कौन शब्द हो चुके हैं अब बौने ” समझदार” रह
Read Moreमौन बर्फ़ से सर्द, हो चुके हैं रिश्ते पिघलाए, सहलाए कौन शब्द हो चुके हैं अब बौने ” समझदार” रह
Read Moreअक्सर दिखते हैं… लाल बत्ती पर… तो कभी फुटपाथों पर ! कभी आँसू लिए … तो कभी आँसू पिए !
Read Moreकभी प्राण बन कभी बाण बन बींध हृदय को जाते हैं ! ये “शब्द” बहुत कुछ कह जाते हैं !
Read Moreगर वर्दी में भी होता दिल किस पर चलता “डंडा” ? ये यक्ष प्रश्न है ! अजब विडम्बना दागी करें
Read Moreकुछ कही, कुछ अनकही सी बातें चाय की चुस्की और बीती यादें ! पुनः किस्से पुराने, दोहराती हैं तेरी यादें…
Read Moreप्रेम अथाह … छुपा दिल में ! दिखाना न आए … ये आदत है !! रिश्ता तुमसे … जुड़ा रूह
Read Moreदर्द सह लेते हैं, अश्क भी पी लेते हैं हम तो आज भी… तेरी यादों में जी लेते हैं ll
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