नारी उत्पीड़न
(नारी उत्पीड़न) नारी की विवशता को आजतक किसने समझा है सदियों से तो….. वो रोती, कलपती, बिलखती ही आई है
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Read Moreजिंदगी एक पहेली सी है जितना सुलझाओ उतना ही उलझती जाती है कब किस मोड़ पर एक चुनौती बनकर सामने
Read Moreदर्जी कहता सुई से तू है कितनी छोटी मैं हूँ, लम्बा चौड़ा दर्ज़ी तू, नाप सके ना उतना करता हूं मैं
Read More(लालच और मोह) अभी कुछ समय बाकी है प्रलयकाल में, समेट लो अपने सारे धन हाँ, तुमने यही तो सोचा
Read Moreझुक जाती हैं नजरें शर्म से जब बहू बेटियों की इज्जत लूट ली जाती है, अपने ही समाज में, ये
Read Moreऔरत की जिंदगी किस्तों के जैसी है जहाँ पर जन्म लिया आँखे खोली वही से शुरू हो जाती है पहली
Read Moreकुछ सहेज रखे है मैंने अपने अन्तःमन के कोने में सपने पर आज न जाने क्यों रह-रह के ये चंचल
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