लोकतंत्र
हमको इतराज़ नहींकोई करे देश पर राजइतराज़ है तो बस इतनाराज शाही में थे जो राजा महाराजादेश आज़ाद पर सब
Read Moreहर वक़्त चेहरे पर नज़र क्यों आतीं यह तल्खियां जाने मन कभी तो मुस्कुराइए देखना चाहते हैं हम मुस्कुराता वही
Read Moreत्यौहार के बीतते ही घर की खुशियाँ जो मेहमान बन आईं थी फिर वापस लौट चली आखिर मेहमान ही तो
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