क्षणिका फुर्सत *ब्रजेश गुप्ता 05/11/202506/11/2025 याद है तुमको मिल लिया करते थे हम जब कभी अब फुर्सत निकालनी पडती है एक छोटी सी भी मुलाक़ात को