वक़्त की हर शै गुलाम
आदमी कितना बेबस हो जाता है जब बूढ़ा बीमार हो लेट जाता है खाट पर मुख मण्डल की सारी आकृति
Read Moreआदमी कितना बेबस हो जाता है जब बूढ़ा बीमार हो लेट जाता है खाट पर मुख मण्डल की सारी आकृति
Read Moreमोदी मोदी मोदी एक ही चर्चा बस मोदी घूम फिर सब बात मोदी पर ही आती कैसा हाल हुआ विपक्ष
Read Moreभीड़ में चलोगे तो भीड़ का हिस्सा बन रह जाओगे भीड़ से अलग दिखना है तो अलग अपना रास्ता चुनना
Read Moreहर कलाई की है चाहत बँधी हो उसपर कोई रेशम की डोरी सजाई हो बहिना ने बड़े प्यार से चाहत
Read Moreअजब निराली ये रीति जगत की हो रसूक जिसका कोई बड़ा हो पद से धन से या फिर बल से
Read Moreहाँ में हाँ मिलाता रहा जैसा दिखाया वैसा देखता रहा आज जैसे ही उनके सत्य को असत्य बताया बर्षों का
Read Moreबुढ़ापा क्या आया लोग हमें खुरापाती न जाने क्या क्या कहने लगे कभी कान में आवाज आती है इस उम्र
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