नियति
फूल हूं प्रकृति का मुरझाकर पत्ता पत्ता होना प्रकृति है मेरी मेरी एक मियाद है खिलूंगा उस मियाद तक बाद
Read Moreआओ खेलें खेल तू मुझ पर कीचड़ उछाल मैं तुझ पर उछालू तू मेरे चेहरे पे मल मैं तेरे चेहरे
Read Moreजरूरी नहीं जो मैं बोलूं वो तू बोले जो तू बोले वो मैं बोलूं मेरे स्वर में अपना स्वर मिलाए
Read Moreआज जब कपड़ों के लिए wardrobe खोला तो वहां मुझे कुछ भीगा भीगा सा लगा. मैं सोचने लगा कि wardrobe
Read Moreचाय सदा बहार पेय है बच्चे बूढ़े और जवान सब को चस्का चाय का काली,निबू वाली फिर हो चाय दूध
Read Moreउम्र तो है आंकड़ों का खेल अभी हूं जवां मैं तन से मैं थका नहीं मन से थका नहीं थकना
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