कविता *ब्रजेश गुप्ता 17/07/202518/07/2025 हाय रोटी रोटी की है यह सब करामात रोटी कर्म कराती रोटी ही जुल्म कराती यह गोल गोल खुद हमें गोल गोल Read More
कविता *ब्रजेश गुप्ता 14/07/202515/07/2025 अकेला वो समझते हैं मैं अकेला हूँ मैं अकेला कहाँ सत्य तो यह है कि मैं खुद के साथ बैठा हूँ Read More
क्षणिका *ब्रजेश गुप्ता 04/07/202504/07/2025 आशिनाई ख्वाबों में आते जाते रहिये माना लड़ाई है आपसे फिर भी हमें आशनाई है आपसे रूबरू मुलाक़ात न भी हो Read More
क्षणिका *ब्रजेश गुप्ता 03/07/202504/07/2025 पहाड़ पहाड़ों पर इतना बोझ बढ़ गया सोचने पर मज़बूर हो गए पहाड़ चलो हम ही क्यों न उतर आये नीचे Read More
कविता *ब्रजेश गुप्ता 13/06/202514/06/2025 वह कौन चमचमाता सितारा कैसे यकायक गर्दिश में खो जाता है दिन का उजाला कैसे रातों में बदल जाता है कौन है Read More
कविता *ब्रजेश गुप्ता 09/06/202509/06/2025 काल का प्रभाव किस पर करें विश्वास करें किस पर अविश्वास अभी अभी जो अर्धांगिनी अग्नि के सात फेरे दुःख सुख में साथ Read More
कविता *ब्रजेश गुप्ता 09/06/202509/06/2025 विकास आओ हम विकास करें सीढ़ी पर पीछे अपने आने वाले को लात मार के जो हो आगाड़ी हमसें टांग खेंच Read More
क्षणिका *ब्रजेश गुप्ता 03/06/202507/06/2025 क्षणकायें जिस चेहरे को चाँद कहा करते थे नूर क्या ढला चाँद के दाग नज़र आने लगे मोहब्बत थी उन्हें चेहरे Read More
कविता *ब्रजेश गुप्ता 02/06/202507/06/2025 अतिथि कौआ बोला कॉव कॉव बैठा छत की मुंडेर नीचे से आवाज आई देखो इसको भगाओ जल्दी क्यों यह बोले कॉव Read More
क्षणिका *ब्रजेश गुप्ता 01/06/202507/06/2025 भूख जब पेट में भूख लगती है न तो अच्छा बुरा कुछ नहीं दिखता नींद हो जब आँखों में बिछावन देखा Read More