नदियाँ
धरती को सरसातीं नदियाँ दूर – दूर तक जातीं नदियाँ उद्गम स्थल से निकली हैं लहर – लहर कर गातीं
Read Moreरंगों के शुभ पर्व में, खूब खिलेंगे रंग बैठेंगे मिल प्रेम से, जब अपनों के संग होली में मिल जाएँगे,
Read Moreहवा कक्ष में आती क्यों है इतना भाव दिखाती क्यों है नहीं गरजना, नहीं बरसना नभ में बदली छाती क्यों
Read Moreजगर – मगर दीपों का आया त्योहार। हँसी – खुशी का लाया, अनुपम उपहार। चमक – दमक, चहल-पहल, कोई न
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