उर की बात
अच्छा है कि समाचार पत्रों या जालपत्र समूहों पर हम लोग एक द्रष्टा या मुसाफ़िर के रूप में रहें व
Read Moreवह गोद मेरी लेट कर, ताके सकल सृष्टि गया; मेरी कला-कृति तक गया, झाँके प्रकृति की कृति गया ! देखा
Read Moreवह समझता मुझको रहा, मैं झाँकता उसको रहा; वह नहीं कुछ है कह रहा, मैं बोलता उससे रहा ! अद्भुत
Read Moreतुहिन* के तीर बिफर, धरा पर जाते बिखर; भूमि तल जाता निखर, प्राण मन होते भास्वर ! पुष्प वत आते
Read Moreतरंगों में फिरा सिहरा, तैरता जो रहा विहरा; विश्व में पैठ कर गहरा, पार आ देता वह पहरा ! परस्पर
Read Moreबुद्धि से मुक्ति मिले बिन, बोध से युक्ति मिले बिन; ज्ञान में गुमता गहमता, उन्मना मन कर्म करता ! समझ
Read Moreअपनों से भरी दुनियाँ, मगर अपना यहाँ कोंन; सपनों में सभी फिरते, समझ हर किसी को गौण ! कितने रहे
Read Moreमत जाओ दूर मेरे सखा, निकट मम रहो; कुछ मन की कहो, हिय की सुनो, चाहते रहो ! आत्मा में
Read Moreसुरों से है मेरा नाता, कोई मुझमें है गा जाता; कभी मैं जान ना पाता, कोई पर उसे सुन जाता
Read Moreउलझना कहाँ वे चहते, अधिक संसार के रिश्ते; बीज जब दग्ध हो जाते, उगा अंकुर कहाँ पाते ! देख
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