एक मुक्तक ताज़ा तरीन हालात पर,,,,,,
तोहमतें हम पर लगाकर वो शिकारी हो गए पोल जब खुलती गयी तो खुद भिखारी हो गए नोट की जो
Read Moreतोहमतें हम पर लगाकर वो शिकारी हो गए पोल जब खुलती गयी तो खुद भिखारी हो गए नोट की जो
Read Moreहमें तेरी जो आदत हो गयी है सुकूँ से अब शिकायत हो गयी है ***************** सितारे टूट के बिखरे जमीं
Read More???????? एक सूरज तुम हथेली आज धर लो साथियो छोड़ के अपना पराया कर बसर लो साथियो आपसी मतभेद
Read More1) झट आ बैठी खोलते ही झरोखा हठीली धूप। 2) नाचती बूंदें छई छपाक छई दादुर कूदें । 3) पंकिल
Read Moreशब्द-शब्द दर्द हार, सुनो मात ये गुहार, गर्भ में पुकारती हैं, नर्म कली बेटियाँ। रोम-रोम अनुलोम, हो न जाए स्वांस
Read Moreपांवड़े पलके बिछाए राह मैं देखा करूँ नैन ढुलके आंसुओं से आस की झोली भरूँ साँझ की दहलीज पे
Read Moreपीर को रख तू छुपा के जख्म ये बाज़ार है जालिमों की बस्तियां औ द्वेष ही संसार है झूठ का
Read Moreजवाँ तुम हो जवाँ हम हैं, जवाँ ये वादियाँ सारी। जवाँ है धड़कनें दिल की, जवाँ मैं दिल गयी हारी।
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