विधाता छंद
जवाँ तुम हो जवाँ हम हैं, जवाँ ये वादियाँ सारी। जवाँ है धड़कनें दिल की, जवाँ मैं दिल गयी हारी।
Read Moreजवाँ तुम हो जवाँ हम हैं, जवाँ ये वादियाँ सारी। जवाँ है धड़कनें दिल की, जवाँ मैं दिल गयी हारी।
Read Moreबनो तो कृष्ण तुम मेरे, तुम्हारी मैं बनूँ राधा। चढ़ा है प्रीत का पारा, कभी उतरे नही आधा। तुम्ही चातक
Read More1) पीता विष का घूँट हूँ, सुनके कड़वी बात। बात-बात में कर गया, बेटा दिल आघात।। बेटा दिल आघात,
Read Moreहो गया न्याय मासूम मुजरिम खत्म अध्याय। ….गुंजन अग्रवाल
Read Moreतुझसे लगाई प्रीत मैंने, झाँक तो अंतर प्रिये। हूँ ख्वाब तेरी आँख का मैं, हूँ नहीं कंकर प्रिये । थामा
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