मुक्तक
16/12 पर मुक्तक कब तक देखूँ राह तुम्हारी, कब तक द्वार निहारूँ कैसी निष्ठुर प्रीत तुम्हारी, कब तक और पुकारूँ
Read Moreऊँघता चाँद प्रभात की चौखट खोजता माँद। टूटती शाख सहेजे अपनों के सपने खाक। बरखा बूँद खेतो में रचे
Read Moreटिमटिमा दीपक गए, फैला दिया उजास। दीवाली ले आ गई, आशा और उल्लास।। जगमग किसने है किये, नभ के दीप
Read Moreहे गणपति गणेश, गौरी नंदन महेश, सुन लो मेरी प्रार्थना, करो पूरन कामना।। हर लो सभी विकार, कांतिप्रिय संसकार, जीवन
Read Moreपल में मिलते हैं गले, पल में लातम लात। राजनीति के खेल में, हर पल होती घात।। लूट रहे है
Read Moreकभी इकरार करते हो कभी इनकार करते हो । मुहब्बत को छिपा दिल में नही इजहार करते हो ।। भुला
Read Moreउदास राधिका न छेड़ प्रेम तान साँवरे । हताश खोजती फिरे मिला न प्रान बाँवरे ।। बुझा सवेर दीप आसमान
Read Moreझाँका है दूर नभ से रामाँ रहीम बन के निकला है आज चन्दा फिर सज के और संवर के भूलो
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