मुक्तक : मुहब्बत गुनगुनायेंगे
छुपा आगोश में अपने इबादत भूल जायेंगे हमारा साथ दो गर तुम मुहब्बत गुनगुनायेंगे न जाना भूल बैठे हम सितारों
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Read Moreसूना पड़ा अँगना यहाँ , सजना गए परदेश है । सोये हुए अरमान को , थपका रहे सन्देश है ।
Read Moreअलियों – कलियों में हुई , कुछ ऐसी तकरार । बूँद – बूँद में घुल रही ,मधुरिम प्रेम फुहार ।।
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Read Moreदिल भर आया आसमान का, आज तो उसे रोने दो खूब तपाया है सूरज ने , सूरज को अब सोने
Read Moreहवा निगोड़ी छेड़ती , नरंम लता शरमाय । मन-ही-मन मुसकाय कें तरु से लिपटी जाय ।। *********************************************** नर्म पाव से
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