छत्रपति शिवाजी महाराज की 337 वीं पुण्यतिथि पर ….समर्पित शब्द सुमन ??? विधा…लावणी छंद में एक गीत
धन्य हुआ शिवनेर दुर्ग था, धन्य हुई भारत माता। जन्म लिये जब वीर शिवाजी, धन्य हुई जीजा माता। लालन-पालन किया
Read Moreधन्य हुआ शिवनेर दुर्ग था, धन्य हुई भारत माता। जन्म लिये जब वीर शिवाजी, धन्य हुई जीजा माता। लालन-पालन किया
Read Moreकभी अहसास से मेरे तिरे अहसास मिल जाते । दिये जो जख्म हैं दिल पर उन्हें तुम काश सिल
Read Moreतुमसे मिल के जाना। जीवन ये मधुवन । था पहले बेगाना । हर शाम सुहानी है। साथ मिला जबसे
Read Moreतुम साँस की चलन हो दिल की तुम्ही हो धड़कन । मेरा वजूद तुमसे तुम हो हमारा जीवन । तुम
Read Moreवाणी पाणिनि शारदे, भर दो मन विश्वास । शीश किये नत हूँ खड़ी, टूट न जाए आस ।। टूट न
Read Moreगया है हार उस जालिम से अब फरियाद करके दिल । न जाने क्यूँ तड़पता फिर उसी को याद करके
Read More1) बेकरारी की तपन हमको जलाकर रख दिया । और हमसे ही हमें तुमने चुराकर रख दिया नींद भी आती
Read Moreतुम्ही छाँव तुम्ही धूप, तुम्ही मेरा प्रतिरूप तुम्ही मेरी आन-बान, जीवन की आस हो जीने का ये रंग-ढंग, साँस-साँस
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